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Monday, 20 August 2012

प्रतिबंध नहीं.......ATTACK.

शोशियल नेट्वर्किंग पर प्रतिबंध क्यों ?......ATTACK ......

पाकिस्तान की भूमि से कारगिल युध्ध हो सके........
पाकिस्तान की भूमि से कश्मीर में युध्ध की परिस्थिति हरदम चलती रहे......
पाकिस्तान की भूमि से मुबई में आतंकी घटना पुरे विश्व को स्तब्ध कर दे......
पाकिस्तान की भूमि से आका ओ की सूचना पर देश के कई इलाको में बम्ब ब्लास्ट करवाये जाय.....
भारत महात्मा गांधी के असूलो से चलित न होते हुवे वार्तालाप के माध्यमो से  बाते करते रहे....उम्मीद के साथ वो पडोशी धर्म निभायेगे.......

असफलता......कसाब को अपना नागरिक समझने से भी इन्कार करने वाले......
                      संसद पर हमले की साझिश से इन्कार करने वाले.......
                      अपनी धरती से आतंक फैलाने ISI को माध्यम बनाने वाले.....
शायद हिन्दुस्तान की शक्तियो को समझने के लिये शक्तिमान नहीं........
और हम......
हमारे कुछ सांसद के कहेने पर........
SMS-MMS पर हमने पाबंधी तो लगा दी.......लेकिन हम शायद यह सौचने पर मजबूर हो रहे है की आनेवाले समय में शोशियल नेटवर्किंग पर भी कुछ समय के लिये पाबंधी लगाईं जाय......क्यों ?

आज राष्ट्र के पूर्व प्रधानमंत्री शहीद राजिव गांधी के  विचारों पर राष्ट्र के प्रमुख वर्तमान पत्र The Hindustan Times के एडिटोरियल में लिखा गया था........"राष्ट्र की औद्योगिक क्रांति में तो हम समय चूक गए लेकिन कोम्पुटर क्रांति में देश के विकास का पहिया कभी नहीं रुकेगा".......वही कोम्पुटर क्रांति के तहत आज भारतीय कोम्प्युटर इजनेर दुनिया में अग्रिम स्थान पर है......और हम.......
शोशियल नेट वर्किंग पर प्रतिबंध की सोच कर रहे है ?
आज हिदुस्तान में शोशियल नेट्वर्किंग पर बहुत राजनीति हो रही है.......यह राजनीति में हर कोई राजकीय पार्टी अपनी ताकत झोक रहा है.......लेकिन क्या यह सभी राजकीय पार्टिया राष्ट्र के सामने खतरा पैदा होने पर ऐक जुट हो कर दुश्मनों का सामना राष्ट्र के हितमे करने नाकाम है ?
पाकिस्तान अगर शोशियल नेट्वर्किंग के माध्यम से किसी भी राष्ट्र की शक्ति को कमजोर बनाना चाहता है तो हम शक्तिसभर बनने में सक्षम है......जरुरत पडने पर "सायबर बोम्ब" से हम पाकिस्तान में खतरे की घंटी बजा नहीं सकते ?.....अगर वह असूलो में विश्वास नहीं रखते तो याद रहे हमारा शामाजिक हमला बेहद परेशानी कर ने में सक्षम है.........
शोशियल नेटवर्किंग पर पाबंधी नहीं ATTACK की टीम आवश्यक है......
हमने शोशियल नेट्वर्किंग को शोशियल रखा है अगर कोई उसे असामाजिक कार्यवाही का माध्यम बना दे तो हमारी भावना "हमला" की ही होनी चाहिए.......
कोम्प्युटर युग में ऐक  द्वार बंध करने से कई और दरवाजे खुलने की संभावना है.........
हम प्रवर्तमान युग का सही इस्तेमाल करे और आतंकी गतिविधि "सायबर" माध्यम से रोके.......

Saturday, 18 August 2012

CAG.......या.......PAC ??

Controller Of Auditor General.......... CAG  ने कोयले खदान की एक रिपोर्ट संसद के सामने पेश की,समझो विरोधपक्ष को कांग्रेस के खिलाफ बोलने का मौक़ा मिल गया.....विरोधपक्ष का धर्म है गलत बातो को उजागर करे....लेकिन संसदीय मर्यादा में, संसदीय कानून के तहत.....
कल तक अन्ना हजारे या रामदेव का असफल रहा आंदोलन जब संसदीय कानून और संविधान के खिलाफ बात कर रहा था सभी पार्टिया संसद में विरोध कर रही थी.......
क्या CAG रिपोर्ट पर हंगामा संसद का अपमान नहीं ?
CAG रिपोर्ट पर कानूनन  कुछ भी करना असंभव है वह जानकारी  विरोधपक्ष नहीं जानता ?
संसदीय कानून के मुताबिक़ CAG की रिपोर्ट अब संसद की Public Accounts Committee (PAC) को सुप्रद होगी....PAC के अध्यक्ष विरोधपक्ष से होता है......आज भाजपा के श्री मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष है......PAC इस रिपोर्ट की तहिकिकात करने के बाद अपना आहेवाल संसद के सामने पेश करेगी और इस के बाद संसद में बहस होगी......उस वक्त सही बाते सामने आएगी........
अगर अन्ना संसद को बहार से अपमानित करे.......
अगर रामदेव फुटपाथ से संसद की गरिमा पर धब्बा लगाये......तो क्या....
विरोधपक्ष संसद में बैठकर ही संसद के कानून की धज्जिया उड़ाकर लोकतंत्र को कलंकित नहीं कर रहा.?.....
अन्ना-रामदेव- का चहेरा भाजपा ही था वह आज दिखाई दे रहा है.........
गुजरात-कर्नाटका के बारे में CAG रिपोर्ट पर भाजपा चुप क्यों है ?
कोयला खदान में राज्यों के प्रतिभाव क्यों नजर अंदाज करने चला है भाजपा ? क्या राज्यों की सत्ता भाजपा की है ?.......बकवास करने में मशहूर जुठ का शहेनशाह मोदी क्या एस्सार-अदाणी-टाटा और अंबानी को बचाने लगे हुए है......
सिर्फ जनता को गुमराह करने लगे हुवे राजकीय पार्टिया संसद का समय बिगाडकर देश को नुकशान करने तुले हुवे है........
डॉ.मनमोहनसिंह जैसे व्यक्ति की छबी  बिगाडने से क्या देश को फ़ायदा होगा ? प्रधानमंत्री अगर गलत कार्यवाही से जुड़े हो वह बात सही मायने में सामने आने पर विरोधपक्ष की कार्यवाही स्वीकृत है......लेकिन....
आयने में अपना चहेरा न देखनेवाले कुछ चंद लोग पहेले अपने गरिमा में झाखे.....दूसरों को गलत तरीके से बदनाम करना बहुत आसान है.....लेकिन राष्ट्र को बनाना अत्यंत गंभीर है.......

Friday, 17 August 2012

न्यायतंत्र हारा......गुन्हगार जीता ??

क्या कानून में बदलाव जरुरी है ??

एक युवती जो आत्महत्या करती है.........
एक व्यक्ति जो ह्त्या की  शंका से घिरे है........
कानून अधिकार देता है उसे किसी भी स्तर पर अग्रिम जमानत की याचिका दायर करने का......
न्यायतंत्र, लोकतंत्र में सबसे ऊपर है या शंका के दायरे में होते हुवे कोई व्यक्ति.....
न्यायतंत्र स्वाभाविक रूपसे राष्ट्र की जनता के  भरोषा का ऐक मंदिर है.......
लेकिन.........
हम देखते रहे........
हम सुनते रहे.......कानून की शंका के दायरे में जो व्यक्ति है वो अपना काम करते रहेता है और कानून भी उसे सुनता रहता है.....
आज की ही घटना के मुताबिक़ ऐक राजकारणी जिस पर ह्त्या में परोक्ष रूप से दोषी होने की शंका है उसकी अग्रिम जमानत की अरजी पर हाईकोर्ट ने कार्यवाही की......
अग्रिम जमानत की अरजी खारिज हुई........लेकिन गुन्हागार अब भी फरार......देश में या विदेश में ? क्या ऐक भगेडू की आवाज सुनना कानून में आवश्यक रखना जरुरी है ?
अग्रिम जमानत याचिका उसका अधिकार है.......लेकिन क्या कानून यह परिवर्तन नहीं चाहता की अदालते अपना फैसला सुनाने के वख्त गुनहगार को अदालत में हाजिर रहेने के आदेश दे और फैसले के मुताबिक़ पुलिस कार्यवाही आगे चले ?
आज शायद न्यायतंत्र हारा है........
न्यायतंत्र के फैसले के मुताबिक़ संकाशील व्यक्ति की अग्रिम जमानत अरजी खारिज होने पर भी गुनहगार फरार है.......
क्या मतलब यह फैसले का......
न्याय कैसे होगा......
आप क्या चाहते है ? क्या कानून में बदलाव जरुरी नहीं ?

बहुत हो चुका....ओ....कोमवादियो..........बस करो.......

क्या राजनीति तबाह करेगी हिन्दुस्तान की ऐकता.....................
कुछ दिनों से आसाम शे जली चिनगारी मुबई होते हुए बेंगलोर-हैदराबाद-पुणे-नाशिक होते हुवे नागपुर जा पहोंची है.....क्या हमने इसी नजरिया से राष्ट्र को देखा है ? राष्ट्र को एक अखंडित बनाने के लिये सरदार पटेल या महात्मा गांधी को भूल चुके है ? देश को आझाद बनाने के लिये शहीदों की शहादत को भूल चुके है ? शहीद इंदिराजी और राजिव जी के बलिदान की यादे मिट चुकी है ?
आसाम में अल्पसंख्यक परिवार को निशाना बनाना या मुंबई में अल्पसंख्यको द्वारा धार्मिक संगठन के रूप में हिंसक प्रदर्शन करना ही हमारा काम है ?
गुजरात में २००२ से शरू हुई यह धर्मकरण की राजनीति जहा राजधर्म नहीं निभाया गया वही बात अब आगे चलती रहेगी ?
सत्ता की राजनीति के लिये क्या यह एक ही मार्ग बचा है ?
क्या सभी राजनीतिक पार्टिया एकता से अपने आप की जिम्मेवारी नहीं समझते ?
एक गंभीर मसला......
उत्तर-पूर्वी राज्य के कई परिवार-युवान-युवती आज देश के कई हिस्सोसे आसाम की और भाग रहे है.....कोई शिक्षा छोड कर....कोई रोजगार छोड कर....सिर्फ अफवा ???
नहीं.....यह सिर्फ अफवा नहीं हो शकती, यह किसी की मनसा है......चाहे वह हिदुस्तान से चाहे वह विदेश से.....
MMS-SMS-SOCIAL NETWORKING.......कौन चला रहा  है.....इंसान ही ? इसान के रूप में हेवान की हेवानियत कब तक बर्दास्त करे ?
क्या अफवा के नाम से.....क्या Social Networking-MMS -SMS के नाम से हम बचना चाहते है ? अवाम के दिलो में यह कोमवाद की बाते उठने की वजह क्या ? अल्पसंख्यक हिदुस्तान में अगर दिल में गभाराहट महेसुस करते है तो दूसरे देशो के अल्पसंख्यक की जबान से अटारी रेलवे स्टेशन पर भी हम शुन रहे है उनकी गभाराहट ......हम सौचने के लिये क्या तैयार नहीं ?
क्या धर्म के नाम पर दंगा ही हमारा मक्षद है.....सिर्फ मत की राजनीति......कोई गम नहीं हमें......कहा जा रहे है हम....कहा ले जा रहे है हम देश को........
राजनीति में लगे सत्ता के भिखारी की यही मनसा हमें मंजूर है........चलो पहेचाने उसे जो जनता का दिल नहीं जित सके वो सत्ता के लिये धर्म के शहारे जनता को मजबूर बना रहे है......
चाहे तुम कही भी हो आसाम में हो या राष्ट्र के किसी भी हिस्से में बेंगलोर-हैदराबाद-पुणे-नाशिक-नागपुर हो या मुंबई  याद रहे हम आपके है, आप हमारे हो.......सावधानी से मक्कमता से लेकिन जहा हो वही रहो.......पूरा देश आपके साथ है......चंद कोमवादी नेताओं का मक्षद असफल बनाने देश आपका सहयोग चाहता है.........

Thursday, 16 August 2012

મોદી નું વધુ એક જુઠ્ઠાણું...........

સ્નેહી શ્રી નરેન્દ્રભાઈ,

રાજ્ય નાં વિકાસ નાં નામે....સદભાવના નાં નામે....કેન્દ્ર સરકાર નાં નામે....
ભ્રષ્ટાચાર નાં નામે....
આપને જુઠ્ઠું બોલવાની આદત પડી ગઈ છે તે હવે જગજાહેર થતી જાતિ વાત છે......
પરંતુ આપ ભ્રષ્ટાચારી હોવા છતા ભ્રષ્ટાચારી નથી તેવું સિદ્ધ કરવા રામદેવ ને ખરીદો તે તો સમજી શકાય કારણ વેચાવ માલ ને ખરીદવાની આપની  આદત જૂની છે પરંતુ ગુજરાત નાં ગૌરવવંતા ઇતિહાસ સમા ભ્રષ્ટાચાર અને મોંઘવારી વિરુદ્ધ નાં ૧૯૭૪ નાં નવનિર્માણ આંદોલન કે જેમાં ૧૬૨ નાગરિકો ની શહાદતે આંદોલન ને એક ઇતિહાસ ની યાદગાર હકીકત તરીકે કંડારી તે આંદોલન માં આપ પણ જોડાયા હતા ? શા માટે આપ આપની જાતને આ ઐતિહાસિક આંદોલન સાથે જોડી આંદોલન ને કલંકિત કરવા નો પ્રયાસ કરો છો ? શું આપ સિદ્ધ કરવા નો પ્રયાસ કરો છો કે આપ ભ્રષ્ટાચાર વિરુદ્ધ પણ લડેલા છો ?
આપને અને નવનિર્માણ આંદોલન ને શું ?
નવનિર્માણ આંદોલન માં કોઈ રાજકીય પક્ષો નો પ્રત્યક્ષ કે પરોક્ષ રીતે હાથ ન હતો......
આપ ને જુઠ્ઠું જ બોલવું હતું તો કોઈક ને પુછવું હતું....કેટલાક મિત્રો PHD થયેલ છે આ જ વિષય ઉપર અને તે પણ પરિમલ ની યુનિવર્સીટી માં નહિ.....ઇતિહાસ ગવાહ છે......
જયપ્રકાશજી ૧૦ ફેબ્રુઆરી ૧૯૭૪ નાં રોજ બે દિવસ માટે અમદાવાદ આવ્યા હતા.....અને ૯,ફેબ્રુઆરી નાં રોજ તો સરકારે રાજીનામું આપ્યું હતું.....પછી જયપ્રકાશજી ને કારણે આંદોલન કઈ રીતે ?
૧૧-ફેબ્રુઆરી થી ૧૭-માર્ચ (ગુજરાત વિધાનસભા નાં વિસર્જન સુધી) જયપ્રકાશજી ગુજરાત આવ્યાનું મને યાદ નથી....હા એવો કોઈ ઉલ્લેખ પણ ક્યાય નથી....તો ગુજરાત નું આંદોલન જયપ્રકાશજી ને કારણે મજબુત કઈ રીતે બન્યું.?
હા, જયપ્રકાશજી એ ૨૧ માર્ચ નાં રોજ પટના ની જાહેરસભા માં ચોક્કસ હાકલ કરી હતી "હમ ગુજરાત સે આયે હૈ નવનિર્માણ લાયે હૈ.....હમને ચીમન કો હટાયા હૈ તો ગફુર ક્યા ચીજ હૈ " ( તે સમયે બિહાર માં અબ્દુલ ગફુર ની સરકાર હતી).
ગુજરાત નાં એક પણ વર્તમાન પત્ર એ આપણા નેતૃત્વ ની ક્યારેય નોંધ પણ લીધી નથી.......
શા માટે આ ખોટું બોલી ગુજરાત નાં પવિત્ર અને સફળ આંદોલન ને કલંકિત કરી શહાદત નું અપમાન કરો છો.........................

Monday, 13 August 2012

क्रांति के नाम को कलंकित न करो........

कुछ घंटो से रामलीला से शरू हुई रामदेव की रामलीला ही क्या महाक्रान्ति है ?
क्रांति विरो ने देश के इतिहास को उज्जवल बनाया है खुशी खुशी फांसी पे चड कर.....शहीद हुए और इतिहास आज भी उसे स्वर्ण अक्षरों में सन्मान करते है.................
सिर्फ राजनीति से प्रेरित रामदेव की क्रांति अपने आप को जेल जाने से घभरा रही है.....पुलिस को सरेंडर करने के बाद बसों में बैठकर अपने आप को जेल जाने से रोकने के लिये बसे चलने नहीं देने पर पुलिस को मजबूर कर रही है......
पुलिस अगर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये कुछ कदम उठाती है तो यह आज के जमाने के क्रांतिवीर सर्वोच्च अदालतों में चले जाते है.....
बात करते है अहिंसा की और पुलिस को उक्षा रही है कार्यरत होने के लिये......
फिर कहेंगे हिंसा के लिये जिम्मेवार सरकार है......
क्रांति का मक्षद "नवनिर्माण" है.......किसी को बदलने का नारा क्या किसी प्रगतिकारक-विचारशील को निमंत्रण है ? राष्ट्र के सर्वोच्च भ्रष्ट यादी में सामिल मोदी-पोखरियाल-यदुरप्पा-रेड्डी बंधू ओ के खम्भे पर बैठे रामदेव की यह कौन सी क्रांति है ? किरण-कजरी जो भ्रष्ट होते हुए क्रांति के हत्यारे है उनका सहयोग क्या बाबा की पहेचान है........
कोमी नारे पर गठित कुछ लोगो का असंवैधानिक संगठन ही भाजपा है.....
रामदेव को सहयोग देने चले गडकरी सिर्फ रामदेव का सहयोग लेने चले थे......उसे मत की आवश्यकता है और रामदेव को ठगी धन की सुरक्षा का.......
बालकृष्ण के साथी गुरु की और क्या पहेचान..................
ठगों के ठग क्रांति के नाम को कलंकिंत करने चले है.............
भ्रस्टाचार और कालेधन की वापसी के लिये कांग्रेस तो अवश्य कार्यरत है.....लेकिन अगर रामदेव ने बिन राजकीय नारा दिया होता शायद पूरा देश आज उसके साथ होता..........
रामदेव शायद भूल गए....."राम को ठगने वाले रामदेव की हालात क्या करेगे"