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Monday, 13 August 2012

क्रांति के नाम को कलंकित न करो........

कुछ घंटो से रामलीला से शरू हुई रामदेव की रामलीला ही क्या महाक्रान्ति है ?
क्रांति विरो ने देश के इतिहास को उज्जवल बनाया है खुशी खुशी फांसी पे चड कर.....शहीद हुए और इतिहास आज भी उसे स्वर्ण अक्षरों में सन्मान करते है.................
सिर्फ राजनीति से प्रेरित रामदेव की क्रांति अपने आप को जेल जाने से घभरा रही है.....पुलिस को सरेंडर करने के बाद बसों में बैठकर अपने आप को जेल जाने से रोकने के लिये बसे चलने नहीं देने पर पुलिस को मजबूर कर रही है......
पुलिस अगर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये कुछ कदम उठाती है तो यह आज के जमाने के क्रांतिवीर सर्वोच्च अदालतों में चले जाते है.....
बात करते है अहिंसा की और पुलिस को उक्षा रही है कार्यरत होने के लिये......
फिर कहेंगे हिंसा के लिये जिम्मेवार सरकार है......
क्रांति का मक्षद "नवनिर्माण" है.......किसी को बदलने का नारा क्या किसी प्रगतिकारक-विचारशील को निमंत्रण है ? राष्ट्र के सर्वोच्च भ्रष्ट यादी में सामिल मोदी-पोखरियाल-यदुरप्पा-रेड्डी बंधू ओ के खम्भे पर बैठे रामदेव की यह कौन सी क्रांति है ? किरण-कजरी जो भ्रष्ट होते हुए क्रांति के हत्यारे है उनका सहयोग क्या बाबा की पहेचान है........
कोमी नारे पर गठित कुछ लोगो का असंवैधानिक संगठन ही भाजपा है.....
रामदेव को सहयोग देने चले गडकरी सिर्फ रामदेव का सहयोग लेने चले थे......उसे मत की आवश्यकता है और रामदेव को ठगी धन की सुरक्षा का.......
बालकृष्ण के साथी गुरु की और क्या पहेचान..................
ठगों के ठग क्रांति के नाम को कलंकिंत करने चले है.............
भ्रस्टाचार और कालेधन की वापसी के लिये कांग्रेस तो अवश्य कार्यरत है.....लेकिन अगर रामदेव ने बिन राजकीय नारा दिया होता शायद पूरा देश आज उसके साथ होता..........
रामदेव शायद भूल गए....."राम को ठगने वाले रामदेव की हालात क्या करेगे"

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