जूठ बोलना मेरा काम है......मैंने कभी सत्य की राह को तरक्की का मार्ग नहीं
समझा......हिसा मेरा कर्तव्य है......अहिंसा से कुछ प्राप्त नहीं
होता......
गांधी के गुजरात में मेरी सोच आज विजय की और मुझे ले गई.....तो मै क्यों गोडसे की कार्यशैली से सहमत न रहू ? गांधी युग की समाप्ति हो चुकी है........
यह सोच-और सोच आधारित कार्य ही जिनके जीवन का मक्षद है वह है नरेंद्र मोदी.......
मै अविवाहित हु..........गलत.
मै नवनिर्माण -१९७४ गुजरात आन्दोलन से नेतृत्व के रूप से जुड़ा हुवा था........गलत.
सन्दर्भ........
http://en.wikipedia.org/wiki/Narendra_Modi#Early_activism_and_politics
अविवाहित और विवाहित में बड़ी लम्बी बहस चली है......२००७ के विधानसभा चुनाव का पर्चा भरने पर "अविवाहित"बताया......और GOOGLE पर विवाहित......
एक सादी-शुदा औरत जो अपनी पत्नी है और बनासकांठा के तेनिवादा गाव में शिक्षिका के रूप में कार्यरत है क्यों उसका स्वीकार नहीं ?....यह बाते तो व्यक्तिगत जीवन की बात है .....लेकिन मै जिस बात से तालुकात रखता हु ......नवनिर्माण-१९७४ आन्दोलन .....जिसका नेतृत्व करने का दावा करने वाला नरेंद्र कौन था १९७४........ज़रा पहेचानिए..........
अपने बड़े भाई सोमभाई का कोंट्राक्ट था वह अहमदाबाद के गितामंदिर स्थित राज्य मार्ग वाहन व्यवहार के बस अड्डे पर केंटिन में कार्यरत एक कर्मचारी......चाय बटोरने का काम....
अगर वह नवनिर्माण आन्दोलन में शामिल थे तो ३,जनवरी १९७४ से १७ मार्च १९७४ तक गुजरात के किसी भी वर्तमानपत्र में प्रसिध्ध मोदी अपने नाम और कार्य की कृपया बात प्रसिध करे........भ्रष्टाचार के विरुध्ध का जंग......महेंगाई के विरुध्ध की आवाज में मोदी की आवाज कही नहीं थी.......नवनिर्माण से क्या पाया.......
(१) भ्रष्ट सरकार का पतन..........(२)भ्रष्ट विधायको से भरी विधानसभा भंग........(३)जयप्रकाश जी ने गुजरात से उठी आवाज को बिहार में उठाया.....(४)असफल रहेने पर यह आवाज बुलंद बनाई....(५)नतीजा इमर्जन्सी......(६)राष्ट्रीय नेतृत्व जेल में बंध.......(७)१९७५ गुजरात विधानसभा चुनाव.....(८) पहेली मर्तबा विरोध दल ने बनाया "जनता मोर्चा" नामक संगठन (९)बहुमत किसी पार्टी को न मिलने पर "नवनिर्माण" का आरम्भ जिस की वजह से हुवा वो उस समय के भ्रष्ट मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बनाई गई पार्टी के सहयोग से जनता मोर्चा ने सरकार बनाई......
आज मोदी दावा कर रहे है वो सरासर जूठ है.......वो कभी जनता के नेता थे ही नहीं......हां , जब पुरे देश में जनता मोर्चा /जनता पार्टी या जनता पक्ष का प्रयोग असफल रहा तो नारंगी का छिलका निकालने पर पेशी या अलग हो जाती है इसी तरह एक पेशी का नाम भारतीय जनता पार्टी बना.........
धर्म आधारित कोमवाद को रूप देने से ही सत्ता हांसल होगी वह जिसका कर्तव्य था वो RSS का एक सिपाही भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को बाजू पर रखके गुजरात का मुख्यमंत्री बना........विधायको द्वारा चुना हुवा यह मुख्यमंत्री नहीं था.......फिर २००२ में मोदी का कार्य शरु हुवा........दुनिया जानती है........
अगर वह नवनिर्माण के नेता थे तो (१) शहादत के शहीद परिवारों के पेंशन में १५ साल में कोई बढ़ोतरी क्यों नहीं ? (२) शहादत की याद को अमर बनाने १५ साल में शहीद स्मारक क्यों नहीं ?...................
जूठ समझो.........यह सिर्फ जनता को गुमराह करके अपनी सत्ता ऊपर चिपकने वाली छिपकली से ज्यादा कुछ नहीं..................
अगर वह कोई चेलेंज करना चाहता है तो हर बात का स्वीकार है..........आज अभी एक गीत की आवाज मै सुन रहा हु......
"सजन रे जूठ मत बोलो......खुदा के पास जाना है.........न हाथी है न घोड़ा है.......वहा तो पैदल ही जाना है............
गांधी के गुजरात में मेरी सोच आज विजय की और मुझे ले गई.....तो मै क्यों गोडसे की कार्यशैली से सहमत न रहू ? गांधी युग की समाप्ति हो चुकी है........
यह सोच-और सोच आधारित कार्य ही जिनके जीवन का मक्षद है वह है नरेंद्र मोदी.......
मै अविवाहित हु..........गलत.
मै नवनिर्माण -१९७४ गुजरात आन्दोलन से नेतृत्व के रूप से जुड़ा हुवा था........गलत.
सन्दर्भ........
http://en.wikipedia.org/wiki/Narendra_Modi#Early_activism_and_politics
अविवाहित और विवाहित में बड़ी लम्बी बहस चली है......२००७ के विधानसभा चुनाव का पर्चा भरने पर "अविवाहित"बताया......और GOOGLE पर विवाहित......
एक सादी-शुदा औरत जो अपनी पत्नी है और बनासकांठा के तेनिवादा गाव में शिक्षिका के रूप में कार्यरत है क्यों उसका स्वीकार नहीं ?....यह बाते तो व्यक्तिगत जीवन की बात है .....लेकिन मै जिस बात से तालुकात रखता हु ......नवनिर्माण-१९७४ आन्दोलन .....जिसका नेतृत्व करने का दावा करने वाला नरेंद्र कौन था १९७४........ज़रा पहेचानिए..........
अपने बड़े भाई सोमभाई का कोंट्राक्ट था वह अहमदाबाद के गितामंदिर स्थित राज्य मार्ग वाहन व्यवहार के बस अड्डे पर केंटिन में कार्यरत एक कर्मचारी......चाय बटोरने का काम....
अगर वह नवनिर्माण आन्दोलन में शामिल थे तो ३,जनवरी १९७४ से १७ मार्च १९७४ तक गुजरात के किसी भी वर्तमानपत्र में प्रसिध्ध मोदी अपने नाम और कार्य की कृपया बात प्रसिध करे........भ्रष्टाचार के विरुध्ध का जंग......महेंगाई के विरुध्ध की आवाज में मोदी की आवाज कही नहीं थी.......नवनिर्माण से क्या पाया.......
(१) भ्रष्ट सरकार का पतन..........(२)भ्रष्ट विधायको से भरी विधानसभा भंग........(३)जयप्रकाश जी ने गुजरात से उठी आवाज को बिहार में उठाया.....(४)असफल रहेने पर यह आवाज बुलंद बनाई....(५)नतीजा इमर्जन्सी......(६)राष्ट्रीय नेतृत्व जेल में बंध.......(७)१९७५ गुजरात विधानसभा चुनाव.....(८) पहेली मर्तबा विरोध दल ने बनाया "जनता मोर्चा" नामक संगठन (९)बहुमत किसी पार्टी को न मिलने पर "नवनिर्माण" का आरम्भ जिस की वजह से हुवा वो उस समय के भ्रष्ट मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बनाई गई पार्टी के सहयोग से जनता मोर्चा ने सरकार बनाई......
आज मोदी दावा कर रहे है वो सरासर जूठ है.......वो कभी जनता के नेता थे ही नहीं......हां , जब पुरे देश में जनता मोर्चा /जनता पार्टी या जनता पक्ष का प्रयोग असफल रहा तो नारंगी का छिलका निकालने पर पेशी या अलग हो जाती है इसी तरह एक पेशी का नाम भारतीय जनता पार्टी बना.........
धर्म आधारित कोमवाद को रूप देने से ही सत्ता हांसल होगी वह जिसका कर्तव्य था वो RSS का एक सिपाही भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को बाजू पर रखके गुजरात का मुख्यमंत्री बना........विधायको द्वारा चुना हुवा यह मुख्यमंत्री नहीं था.......फिर २००२ में मोदी का कार्य शरु हुवा........दुनिया जानती है........
अगर वह नवनिर्माण के नेता थे तो (१) शहादत के शहीद परिवारों के पेंशन में १५ साल में कोई बढ़ोतरी क्यों नहीं ? (२) शहादत की याद को अमर बनाने १५ साल में शहीद स्मारक क्यों नहीं ?...................
जूठ समझो.........यह सिर्फ जनता को गुमराह करके अपनी सत्ता ऊपर चिपकने वाली छिपकली से ज्यादा कुछ नहीं..................
अगर वह कोई चेलेंज करना चाहता है तो हर बात का स्वीकार है..........आज अभी एक गीत की आवाज मै सुन रहा हु......
"सजन रे जूठ मत बोलो......खुदा के पास जाना है.........न हाथी है न घोड़ा है.......वहा तो पैदल ही जाना है............
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